Ajay Kumar

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    हर मुसाफ़िर पे उसका चेहरा है
    आपका वहम भी ग़ज़ब का है

    रेगज़ारों में दूर का आलम
    हमको अक्सर करीब लगता है

    हम तबीअत से डूब जाएँगे
    मय-कदे का निज़ाम गहरा है

    आपके तो अज़ीज़ होते थे
    आपने अजनबी बताया है?

    एक सूखी हुई नदी का दुख
    एक वीरान सा किनारा है

    तब ख़ुशी सामने से आती थी
    अब कोई सामने भी आता है?
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    Ajay Kumar
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    "लिमिट"
    कोई आबाद सितारे की कोई हद हो तो
    वो सितारा किसी तस्वीर में होगा
    आसमाँ में नहीं हो सकता
    और उस आसमाँ का
    कोई भी फ़्रेम नहीं होता
    होगा भी कैसे?
    उसके पेंटर ने उसे ऐसे बनाया है
    जैसे कमरे की कोई छत है
    जिस पे तारों के डिज़ाइन बने है
    और वो सारे डिज़ाइन
    शाम के बाद नज़र आते है
    जिनको सब तोड़ने की कसमें भी खाते हैं
    और वो सारी की सारी
    कसमें झूठी हैं
    क्या कोई फूलों के रंगों को मिटा पाया है
    क्या किसी ख़्वाब ने
    सच दिखाया है
    या किसी बेवफ़ा ने सच्ची मोहब्बत की हो
    या गुलाबों ने भी इज़हार किया हो
    आदमी, आदमी से प्यार किया हो
    या कभी पानी को पानी में
    डूबते देखा हो
    और तब पानी में
    उस सितारे की सभी रातों की हद क्या है?
    तुम बताओ मिरी इन बातों की हद क्या है?
    या मिरी बातें भी
    उन सितारों की तरह ही किसी
    फ़्रेम का हिस्सा है?
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    Ajay Kumar
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    अपनों से जुदा होना आसान नहीं होता
    इतना भी कोई पत्थर चट्टान नहीं होता

    दिल टूटने पर इक सदमा ही तो गुजा़रेंगे
    दिल टूटने का कोई नुक़सान नहीं होता

    बे-जान किताबें कमरे में पड़ी रहती हैं
    सो तेरे बिना कमरा वीरान नहीं होता

    खूँ-रंग सी आँखों का ये हाल नहीं होता
    होता है मगर उसके दौरान नहीं होता

    जिन बंद घरों को काले रंग की आदत हो
    उन बंद घरों में रौशनदान नहीं होता

    मैं शायरी के सारे करतब भी दिखाता हूँ
    वो रोज़ की ख़िदमत से हैरान नहीं होता
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    Ajay Kumar
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    तिरे बाद ऐसे गुज़ारा किया
    मैंने हर किसी से किनारा किया

    मैं जिसका सहारा हुआ करता था
    उसी ने मुझे बे-सहारा किया

    था जो हाल फरहाद या क़ैस का
    वही हाल उसने हमारा किया

    किसी से तअल्लुक़ रखेंगे नहीं
    मिरी ओर उसने इशारा किया
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    Ajay Kumar
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    मुझे इतना अकेला कर गया तो?
    हवाओं से कभी मैं डर गया तो?

    तिरा दिल मुझ से भरने लग गया है
    अगर ऐसे मिरा दिल भर गया तो?

    मुझे तुम याद करते हो जो इतना
    कभी मैं हिचकियों से मर गया तो?
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    Ajay Kumar
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    मुझे तुम याद करते हो जो इतना
    कभी मैं हिचकियों से मर गया तो
    Ajay Kumar
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    क्यूँ हमारी याद भी अब याद बनकर रह गई है
    लॉकडाउन हो गया है आपके पिंदार में क्या
    Ajay Kumar
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    न ख़्वाहिशें बची मिरी कि बद-मज़ा है ज़िंदगी
    न ज़िदगी ख़राब हो तो क्या हुई वो दिल्लगी
    Ajay Kumar
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    गांव से शहर को जोड़ते हैं
    लोग कितने तो घर तोड़ते है

    आसमाँ में धनी दौड़ता है
    बस्तियों में हुनर दौड़ते हैं
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    Ajay Kumar
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    देखना है तो तुम इधर देखो
    तुम ठहर कर मिरा नगर देखो

    ऐब ही देखते हो क्यों मुझमें
    तुम कभी तो मिरा हुनर देखो

    अब न जाने कहाँ वो रहता है
    यार उसकी कहीं ख़बर देखो

    सब बुरी आदतें भी छोड़ो तुम
    उसकी इस बात का असर देखो

    तुम अभी से ही थक गए हो पर
    पूरा बाकी है ये सफ़र देखो

    तुम अभी सच बता दो अच्छा है
    फिर कहीं तुम इधर उधर देखो
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    Ajay Kumar
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