Ajay Kumar

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@Hindi_poeticday

Ajay Kumar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ajay Kumar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मुझे तुम याद करते हो जो इतना कभी मैं हिचकियों से मर गया तो — Ajay Kumar
न ख़्वाहिशें बची मिरी कि बद-मज़ा है ज़िंदगी न ज़िदगी ख़राब हो तो क्या हुई वो दिल-लगी — Ajay Kumar

Ghazal

ग़ौर से हम एक चेहरा सोचते हैं उस की आँखों का तमाशा सोचते हैं मैं ज़रा सा एक मतला सोचता हूँ लोग उस में दर्द अपना सोचते हैं जब मुसलसल सोचने की हो रिवायत तो वहाँ पर लोग सबका सोचते हैं एक तो तस्वीर पोशीदा रखी है और अक्सर उस का क़िस्सा सोचते हैं सब रक़ीबों पर तरस आता है मुझ को रात भर उस बे-वफ़ा का सोचते हैं लोगों का अंदाज़ कारोबार का है और हम कम-बख़्त सादा सोचते हैं जो भी चारों और सोचा जा रहा है हम उसी दुनिया के जैसा सोचते हैं अब मुझे भी सोचना पड़ता है अक्सर आपने भी तो कहा था सोचते हैं जिन उजालों की तबाही रात को है वो उजाले रात को क्या सोचते हैं कुछ दिसम्बर के नज़ारे ले रहे हैं कुछ अभी से जनवरी का सोचते हैं — Ajay Kumar

Nazm

"लिस्नर" कभी ख़ामोश रह कर देखना इस ज़िंदगी को तुम तुम्हें औरों के होंटों पर कई रंगों के अफ़्साने मिलेंगे जो सह में सह में से कुछ कहना चाहेंगे मगर तुम बोलना मत उन्हें सुनने की कोशिश करना हो सकता है तुम्हारा बात करने को जी चाहे हो सकता है कि इतनी देर चुप रहने से तुम्हें तो उल्टियाँ होने लगे मगर तुम बे-क़रारी को सँभाले हुए रंगों की ख़ुशबू ओढ़ लेना और उसी दुनिया में खो कर अपना मन आबाद कर लेना ये ख़ामोशी तुम्हारे सामने कई तन्हा से लफ़्ज़ों की रिहाई के दरीचे खोल देगी तुम्हारे पेट की सब तितलियाँ भी उन्हीं बातों को दुनिया मान लेगी जो भी उस कैनवस का हिस्सा होंगी वहाँ से सारे सन्नाटे रवाँ हो कर नए रस्ते की जानिब चल पड़ेंगे जहाँ कोई सियाही से तुम्हारी ज़िंदगी के रंगों को नए आयाम दे कर छोड़ देगा जहाँ उन रंगों की सब परतें खुल जाएँगी वहीं पर उन के होंटों की सहेली सैंकड़ों इशारे कर रही होंगी जहाँ से उस कहानी के सभी किरदार अपनी अदाकारी से बाक़ी सीन को पूरा करेंगे ये सारी बातें तो होती रही हैं सालों से मगर इस बार की सतरें भी धीमी करवटें ले कर तुम्हारे मन पटल पर नया ख़ाका बना कर छोड़ देगी जो शायद यूँँ नहीं था पहले! — Ajay Kumar
"लिमिट" कोई आबाद सितारे की कोई हद हो तो वो सितारा किसी तस्वीर में होगा आसमाँ में नहीं हो सकता और उस आसमाँ का कोई भी फ़्रेम नहीं होता होगा भी कैसे? उस के पेंटर ने उसे ऐसे बनाया है जैसे कमरे की कोई छत है जिस पे तारों के डिज़ाइन बने है और वो सारे डिज़ाइन शाम के बा'द नज़र आते है जिन को सब तोड़ने की क़स में भी खाते हैं और वो सारी की सारी क़स में झूठी हैं क्या कोई फूलों के रंगों को मिटा पाया है क्या किसी ख़्वाब ने सच दिखाया है या किसी बे-वफ़ा ने सच्ची मोहब्बत की हो या गुलाबों ने भी इज़हार किया हो आदमी, आदमी से प्यार किया हो या कभी पानी को पानी में डूबते देखा हो और तब पानी में उस सितारे की सभी रातों की हद क्या है? तुम बताओ मिरी इन बातों की हद क्या है? या मिरी बातें भी उन सितारों की तरह ही किसी फ़्रेम का हिस्सा है? — Ajay Kumar