Shan Sharma

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@shansharma

Shan Sharma shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shan Sharma's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मुझे मंज़ूर है हर बात पर इक शर्त है मेरी मुझे बोसा तिरा होना है अव्वल इस जुदाई में — Shan Sharma
ढूँढ़ते हैं लोग दिलबर दूसरा फिर तीसरा मुस्तक़िल अब आशिक़ी की नौकरी रहती नहीं — Shan Sharma
अभी के ज़ख़्म ख़ाली जेब के हैं मोहब्बत तो पुराना हादसा थी — Shan Sharma
किताबें शौक़ से पढ़ने लगी तुम मैं भी थोड़ा बहुत लिखने लगा हूँ — Shan Sharma
ज़ख़्म तुझ को नवाज़ दूँ भी गर पर न धोखा मैं दिलरुबा दूँगा — Shan Sharma
नाम वैसे ग़ुलाम मेरा था शाह की पर ग़ुलाम रानी थी — Shan Sharma
इश्क़ पनपेगा तो फिर अश्कों की होंगी बारिशें पेड़ लगने पर कभी सूखी ज़मीं रहती नहीं — Shan Sharma
बन गए तल्ख़ आजकल वैसे हम सरापा कभी मोहब्बत थे — Shan Sharma
आँसू आ कर ग़म को ऐसे धो जाते गंगा माँ धोती हैं जैसे पापों को — Shan Sharma
लाख ग़म वो करे अता फिर भी वो ख़ुदा है ख़ुदा रहेगा वो — Shan Sharma
वो लड़की है शातिर दुनियादारी में इश्क़ मुहब्बत में पर थोड़ी मद्धम है — Shan Sharma

Ghazal

लबों पे उस के मिसरा लग रहा है मिरा ये नाम नग़्मा लग रहा है पुकारा है मुझे जिस पल से उस ने मुझे वो शख़्स अपना लग रहा है किसी सय्याद का हो जाल जैसे अदा से उस की ख़तरा लग रहा है महक है इस फ़ज़ा में भीनी भीनी ये उस के घर का रस्ता लग रहा है हमारा नाम जोड़ा जा रहा है मुझे ये काम उम्दा लग रहा है तुम्हें ये चाँद दिलबर सा लगे है मुझे दिलबर का झुमका लग रहा है चुभेगा मख़मली बिस्तर भी मुझ को मुझे धरती पे अच्छा लग रहा है उसी की राह मैं तकता हूँ छत पे जिसे सीढ़ी से डर सा लग रहा है वफ़ा के बोझ से मैं दब रहा था चुकाया क़र्ज़ हल्का लग रहा है ख़ुशी से मिल रहे हो "शान" इतनी मुझे लहजे में शिकवा लग रहा है — Shan Sharma