kaha hai aajtak jo waqia sab | कहा है आजतक जो वाक़िआ सब

  - Shan Sharma

कहा है आजतक जो वाक़िआ सब
वही बोलेंगे फिर इस मर्तबा सब

नसीहत एक सी देते हो मुझको
करे बैठे हो क्या तुम मशवरा सब

मैं इतना भी नहीं भटका हूँ यारों
बने फिरते मिरे क्यूँ रहनुमा सब

कहीं वो खो गई हैं दरमियाँ में
करी है आजतक जो इब्तिदा सब

हक़ीक़त देखना आने लगा है
हुए हैं ख़्वाब जब से गुमशुदा सब

सुनो मुझको पता है तुम वही हो
यहाँ कहते हैं जिसको अप्सरा सब

क़दम मेरे न पहुँचे यार तुम तक
ग़लत बतला रहे थे रास्ता सब

कहो तुम झूठ चाहे 'शान' ख़ुद से
मगर सच जानता है वो ख़ुदा सब

  - Shan Sharma

More by Shan Sharma

As you were reading Shayari by Shan Sharma

Similar Writers

our suggestion based on Shan Sharma

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari