
मुझे अच्छा नहीं लगता ये कहना हमनवाई में
हुआ पर है बहुत नुक़सान तुझ से आशनाई में
दिया है वक़्त जितना इक तिरी इस चाह को मैं ने
ख़ुदा मिल जाता है इतने दिनों की पारसाई में
— Shan Sharma
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