labon pe uske misra lag raha hai | लबों पे उसके मिसरा लग रहा है

  - Shan Sharma

लबों पे उसके मिसरा लग रहा है
मिरा ये नाम नग़मा लग रहा है

पुकारा है मुझे जिस पल से उसने
मुझे वो शख़्स अपना लग रहा है

किसी सय्याद का हो जाल जैसे
अदास उसकी ख़तरा लग रहा है

महक है इस फ़ज़ा में भीनी भीनी
ये उसके घर का रस्ता लग रहा है

हमारा नाम जोड़ा जा रहा है
मुझे ये काम उम्दा लग रहा है

तुम्हें ये चाँद दिलबर सा लगे है
मुझे दिलबर का झुमका लग रहा है

चुभेगा मख़मली बिस्तर भी मुझको
मुझे धरती पे अच्छा लग रहा है

उसी की राह मैं तकता हूँ छत पे
जिसे सीढ़ी से डर सा लग रहा है

वफ़ा के बोझ से मैं दब रहा था
चुकाया क़र्ज़ हल्का लग रहा है

ख़ुशी से मिल रहे हो "शान" इतनी
मुझे लहजे में शिकवा लग रहा है

  - Shan Sharma

Raasta Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shan Sharma

As you were reading Shayari by Shan Sharma

Similar Writers

our suggestion based on Shan Sharma

Similar Moods

As you were reading Raasta Shayari Shayari