राएगाँ थे या फिर अमानत थेजो भी थे हम तिरी बदौलत थेबन गए तल्ख़ आजकल वैसेहम सरापा कभी मोहब्बत थेचाहतें दिल की बेमुरव्वत थीदिल के सब फ़ैसले हिमाक़त थेथीं दरारें मिरी हक़ीक़त मेंवहम हर चाक की मरम्मत थेवो मजाज़ी सी इक हसीना थी'शान' के शे'र जिस के बाबत थे— Shan Sharma