अपनों से जुदा होना आसान नहीं होता

इतना भी कोई पत्थर चट्टान नहीं होता

दिल टूटने पर इक सदमा ही तो गुजा़रेंगे
दिल टूटने का कोई नुक़सान नहीं होता

बे-जान किताबें कमरे में पड़ी रहती हैं
सो तेरे बिना कमरा वीरान नहीं होता

खूँ-रंग सी आँखों का ये हाल नहीं होता
होता है मगर उस के दौरान नहीं होता

जिन बंद घरों को काले रंग की आदत हो
उन बंद घरों में रौशनदान नहीं होता

मैं शा'इरी के सारे करतब भी दिखाता हूँ
वो रोज़ की ख़िदमत से हैरान नहीं होता

— Ajay Kumar

More by Ajay Kumar

Other ghazal from the same pen

See all from Ajay Kumar →

Education Shayari

Shers of education.

All Education Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling