एक आवाज़ पे आ जाती है दौड़ी दौड़ीदश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान नहीं देखती हैदोस्ती दोस्ती होती है तुम्हें इल्म नहींदोस्ती फ़ाइदा नुक़सान नहीं देखती है— Aadil Rasheed