मैं ने रखी है एक सदी की शिकायतें
ख़त में शरीक होंगी सभी की शिकायतें
सैलाब के मुसाफ़िरों ने मशवरा दिया
कोई ख़ुदा से कर दो नदी की शिकायतें
दो दिन भी ज़िंदगी से रियायत नहीं मिली
यूँ उम्र-भर रही है किसी की शिकायतें
इस बार दोस्तों से मुलाक़ात करनी है
मैं कब तलक करूँगा घड़ी की शिकायतें
जब एक क़ाफ़िले में उदासी शुमार थी
चेहरे भी कर रहे थे हँसी की शिकायतें
जो मौसमों की मार पड़ी है कई बरस
बरसात ने की होगी सभी की शिकायतें
— Ajay Kumar















