मिरी वफ़ाओं का उस को ख़याल आता है
उसे तमाम जहाँ का मलाल आता है
हमारे बीच में नज़दीकियाँ रही होंगी
इसी लिए ही तुम्हारा ख़याल आता है
कभी कभी तो मैं आता हूँ ऐन मौक़े' पर
कभी कभी मुझे ख़ुद पे सवाल आता है
तुम्हारे साथ में देखा हुआ वो इक सपना
उदासी के दिनों में इस्तिमाल आता है
ये ज़िंदगी का सितम भी अजीब लगता है
नई ही शक्ल में हर एक साल आता है
— Ajay Kumar















