जो तेरे बा'द भी पत्थर रहा है

वो दिल भी टूटने से डर रहा है

किसी को छोड़ के जाऊँ भी कैसे
कोई मुझ पे भरोसा कर रहा है

सफ़र में मुश्किलें होते हुए भी
सफ़र में हौसला अक्सर रहा है

तुम्हारे चाँद-चेहरे की चमक से
ये कमरा रौशनी से भर रहा है

मोहब्बत में तमाशे ही बचे हैं
मोहब्बत का सलीक़ा मर रहा है

तुम्हारी ज़िंदगी में हौसला था
हमारी ज़िंदगी में डर रहा है

— Ajay Kumar

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