हिज्र का मौसम काली रातें
कौन ही काटे ऐसी रातें
सारे सपने टूट गए हैं
पीछे रह गई बाक़ी रातें
बेबस करती मुझ को अक्सर
तेरे साथ बिताई रातें
हम ने रोना सीख लिया है
देखो जब से आई रातें
भूलने वाले भूल चुके हैं
हम ने कर ली काली रातें
हर जंगल ने देखी होंगी
काली गहरी लंबी रातें
मेरी तरफ़ भी मुड़ के देखो
काट रहा हूँ कैसी रातें
— Ajay Kumar















