सभी के सामने इक दिल बनाया
उसे अपना सर-ए-महफ़िल बनाया
जहाँ बस्ती बनाना चाहते थे
समुंदर ने वहीं साहिल बनाया
हमीं ने इन किताबों से बिछड़ के
सुख़न के काम को मुश्किल बनाया
मिरे माँ बाप की इस ज़िंदगी ने
मुझे इंसान के क़ाबिल बनाया
मुहब्बत के दिनों में रास्तों ने
तुम्हारी गलियों को मंज़िल बनाया
— Ajay Kumar















