अश'आर मिरे यूँँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शे'र फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैंये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबेंइक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं— Jaan Nisar Akhtar