Asad Khan

Top 10 of Asad Khan

    जीने की बात चल रही है दोस्त
    ज़िंदगी क्यों मचल रही है दोस्त

    वस्ल के दिन है और ख़ाली है जेब
    सो मुलाक़ात टल रही है दोस्त
    Read Full
    Asad Khan
    4 Likes
    इस जवानी का फ़साना भूल जाऊॅं
    ज़ख़्मी हूॅं तो दिल लगाना भूल जाऊॅं

    यानी तुझको याद करना बंद कर दूॅं
    यानी मेरी जाँ मैं खाना भूल जाऊॅं
    Read Full
    Asad Khan
    0 Likes
    दुख में याद आती है उसी की मुझे
    कितने रस्ते हैं इक गली की तरफ़
    Asad Khan
    0 Likes
    तितलियों में क़याम था मेरा
    कितना ऊँचा मक़ाम था मेरा

    दाल रोटी निकाल लेता था
    शायरी करना काम था मेरा
    Read Full
    Asad Khan
    1 Like
    इन्हें मालूम है रुतबा हमारा
    सो ये सुनते नहीं रोना हमारा

    बिता दी उम्र सारी इस गुमाँ में
    अभी तो ज़िंदा है रिश्ता हमारा

    तेरी तस्वीर जब होती थी इसमें
    भरा ही रहता था बटवा हमारा

    वो वाली बेंच पर तुम बैठना सिर्फ़
    वहाँ पर नाम लिख देना हमारा

    मुहब्बत में गुज़ारी थी जवानी
    बुढ़ापे में हुआ झगड़ा हमारा
    Read Full
    Asad Khan
    0 Likes
    ख़ुदाया गुज़ारिश है ईमान के साथ
    उसे लौटा दे फिर से रमज़ान के साथ
    Asad Khan
    2 Likes
    देख कर ईद का चाॅंद मैं करता क्या
    तेरी तस्वीर तो कमरे में रक्खी है
    Asad Khan
    1 Like
    जुदा होने वाले मेरी बात तो सुन
    तू आ या न आ, तेरी याद आ रही है
    Asad Khan
    1 Like
    उसे मिली है सहूलत ये हुस्न से अपने
    वो क़त्ल कर दे तो इल्ज़ाम भी नहीं आता
    Asad Khan
    1 Like
    सब शुरू में हमसे अच्छा बोलते हैं
    बेसबब फ़िर उल्टा सीधा बोलते हैं

    रात जंगल में गुज़ारी तो ये पाया,
    पेड़ इक दूजे से कितना बोलते हैं
    Read Full
    Asad Khan
    2 Likes

Top 10 of Similar Writers