इन्हें मालूम है रुतबा हमारा
सो ये सुनते नहीं रोना हमारा
बिता दी उम्र सारी इस गुमाँ में
अभी तो ज़िंदा है रिश्ता हमारा
तेरी तस्वीर जब होती थी इसमें
भरा ही रहता था बटवा हमारा
वो वाली बेंच पर तुम बैठना सिर्फ़
वहाँ पर नाम लिख देना हमारा
मुहब्बत में गुज़ारी थी जवानी
बुढ़ापे में हुआ झगड़ा हमारा
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