हम ऐसे इश्क़ के मारों को तन्हा मार देती है
मोहब्बत जान की प्यासी है बंदा मार देती है
मोहब्बत जान की प्यासी है बंदा मार देती है
अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के
मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है
हम उस के दिल में रहते हैं सो अच्छे हैं वगरना दोस्त
अदाओं से तो आशिक़ को वो ज़िंदा मार देती है
किसी रस्सी, किसी पंखे पे ये इल्ज़ाम आया पर
कोई ख़ुद से नहीं मरता ये दुनिया मार देती है
हम ऐसे लोग ग़लती से कभी जो ख़्वाब देखें तो
ग़रीबी ख़्वाब के मुँह पे तमाचा मार देती है
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मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर
उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
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अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के
मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है
मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है
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है समझना आप को तो शे'र से इज़हार समझें
बात कहने को भला हम फूल क्यूँ तोड़ा करेंगे
बात कहने को भला हम फूल क्यूँ तोड़ा करेंगे
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कैसे बताऊँ अब मुझे क्या-क्या नहीं पसंद
बस तू पसंद है कोई तुझ-सा नहीं पसंद
बस तू पसंद है कोई तुझ-सा नहीं पसंद
नींदें उड़ा गए जो इन आँखों के ख़्वाब थे
ऐसा नहीं कि अब मुझे सोना नहीं पसंद
लौटा के जब से आएँ हैं कॉपी वो उस की हम
तब से हमें तो अपना ही बस्ता नहीं पसंद
पहले बनाया उस ने तो अपनी तरह मुझे
कहता है अब कि मैं उसे ऐसा नहीं पसंद
जिस्मों के रस्ते अा गए हैं दिल तलक तो हम
आसाँ बहुत है पर, हमें रस्ता नहीं पसंद
फिर आप ऐसी दरिया पे लानत ही भेजिए
मेरी तरह का गर उसे प्यासा नहीं पसंद..
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