Ankit Maurya

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    हम ऐसे इश्क़ के मारों को तन्हा मार देती है
    मोहब्बत जान की प्यासी है बंदा मार देती है

    अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के
    मैं उसपे शेर कहता हूं, वो ताना मार देती है

    हम उसके दिल में रहते हैं सो अच्छे हैं वगरना दोस्त
    अदाओं से तो आशिक़ को वो ज़िंदा मार देती है

    किसी रस्सी, किसी पंखे पे ये इल्ज़ाम आया पर
    कोई ख़ुद से नहीं मरता ये दुनिया मार देती है

    हम ऐसे लोग ग़लती से कभी जो ख़्वाब देखें तो
    ग़रीबी ख़्वाब के मुंह पे तमाचा मार देती है
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    Ankit Maurya
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    मुझको बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर
    उसने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
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    जन्नत में आ गया था किसी अप्सरा पे दिल
    जिसकी सज़ा-ए-मौत में दुनिया मिली मुझे
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    पहले लगा था हिज्र में जाएँगे जान से
    पर जी रहे हैं और भी हम इत्मिनान से
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    दुनिया तुली थी हमको बनाने पे देवता
    पर हम किसी भी हाल में पत्थर नहीं हुए
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    अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के
    मैं उसपे शेर कहता हूं, वो ताना मार देती है
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    है समझना आपको तो शे'र से इज़हार समझें
    बात कहने को भला हम फूल क्यों तोड़ा करेंगे
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    जीत भी लूं गर लड़ाई तुम से मैं तो क्या मिलेगा
    हाथ में दोनों के बस इक टूटा सा रिश्ता मिलेगा

    कर के लाखों कोशिशें गर जो बचा भी लूँ मैं रिश्ता
    तो नहीं फिर मन हमारा पहले के जैसा मिलेगा
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    कैसे बताऊं अब मुझे क्या-क्या नहीं पसंद
    बस तू पसंद है कोई तुझ-सा नहीं पसंद

    नींदें उड़ा गए जो इन आंखों के ख़्वाब थें
    ऐसा नहीं कि अब मुझे सोना नहीं पसंद

    लौटा के जब से आएं हैं कॉपी वो उसकी हम
    तब से हमें तो अपना ही बस्ता नहीं पसंद

    पहले बनाया उसने तो अपनी तरह मुझे
    कहता है अब कि मैं उसे ऐसा नहीं पसंद

    जिस्मों के रस्ते अा गए हैं दिल तलक तो हम
    आसां बहुत है पर, हमें रस्ता नहीं पसंद

    फिर आप ऐसी दरिया पे लानत ही भेजिए
    मेरी तरह का गर उसे प्यासा नहीं पसंद..
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    Ankit Maurya
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    इन को दुख कि हम से वो कहते ये कैसे हम ग़लत थे
    इस लिए पहले ही हम ने कह दिया कि हम ग़लत थे

    वो ख़फ़ा हैं जाने कब से क्या पता किस बात पे हों
    फ़र्ज़ बनता है हमारा कह दें उन से हम ग़लत थे

    तुम इशारा कर तो देते कि नहीं जाना है तुम को
    रोक लेते हम तुम्हें कह देते सब से हम ग़लत थे

    हम किसी भी तौर उस को साथ रखना चाहते थे
    हम ने मुआ'फ़ी माँग ली ऐसे कि जैसे हम ग़लत थे

    हम लड़ेंगे ख़ूब दोनों पहले तो इक दूजे से फिर
    रोते रोते ये कहेंगे हम ग़लत थे हम ग़लत थे
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