हम ऐसे इश्क़ के मारों को तन्हा मार देती है

मोहब्बत जान की प्यासी है बंदा मार देती है

अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के
मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है

हम उस के दिल में रहते हैं सो अच्छे हैं वगरना दोस्त
अदाओं से तो आशिक़ को वो ज़िंदा मार देती है

किसी रस्सी, किसी पंखे पे ये इल्ज़ाम आया पर
कोई ख़ुद से नहीं मरता ये दुनिया मार देती है

हम ऐसे लोग ग़लती से कभी जो ख़्वाब देखें तो
ग़रीबी ख़्वाब के मुँह पे तमाचा मार देती है

— Ankit Maurya

More by Ankit Maurya

Other ghazal from the same pen

See all from Ankit Maurya →

Aadmi Shayari

Shers of aadmi.

All Aadmi Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling