कैसे बताऊँ अब मुझे क्या-क्या नहीं पसंद
बस तू पसंद है कोई तुझ-सा नहीं पसंद
नींदें उड़ा गए जो इन आँखों के ख़्वाब थे
ऐसा नहीं कि अब मुझे सोना नहीं पसंद
लौटा के जब से आएँ हैं कॉपी वो उस की हम
तब से हमें तो अपना ही बस्ता नहीं पसंद
पहले बनाया उस ने तो अपनी तरह मुझे
कहता है अब कि मैं उसे ऐसा नहीं पसंद
जिस्मों के रस्ते अा गए हैं दिल तलक तो हम
आसाँ बहुत है पर, हमें रस्ता नहीं पसंद
फिर आप ऐसी दरिया पे लानत ही भेजिए
मेरी तरह का गर उसे प्यासा नहीं पसंद..
— Ankit Maurya















