पर्दा रखती है रिश्ते का
इज़्ज़त वो ही अस्तर है
इज़्ज़त वो ही अस्तर है
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हर्फ़-ए-आख़िर है अगर तो रहने दीजे
इब्तिदास इंतिहा तक का सफ़र है
इब्तिदास इंतिहा तक का सफ़र है
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कैसे कैसे बस्ती में आए हैं ये काफ़िर
कहते हैं पत्थर से मेरा ख़ुदा निकलेगा
कहते हैं पत्थर से मेरा ख़ुदा निकलेगा
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इश्क़ मायूस होता है
मुझ को महसूस होता है
मुझ को महसूस होता है
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हाल-ए-दिल मेरा क्या सुनेंगे वो
जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक
जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक
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