AKASH

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    यहाँ पर चलता है जलवा हमारा
    तू कुछ भी कर नहीं सकता हमारा

    बहुत अच्छा हमारा दिल है लेकिन
    बहुत बेकार है लहजा हमारा

    जो आये काटने थे माँझा यारों
    कटा उनसे नहीं धागा हमारा

    दबा कर उँगलियाँ दाँतों में बोली
    कभी तू फोन काटेगा हमारा

    वो आके अपना रख देती है बस्ता
    जहाँ पर होता है बस्ता हमारा
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    सब्ज़ रहता है पानी के बिन कुछ दिनों
    पेड़ इक दम से तो सूख जाता नहीं
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    हँसाया भी कभी मुझको रुलाया भी
    ये थोड़ा थोड़ा मुझको हिज्र भाया भी

    तेरे जाने का जाएगा नहीं ये ग़म
    अगर तू पास मेरे लौट आया भी

    वो आलम देखा है तन्हाई का मैंने
    नहीं मुझसे था करता बातें साया भी

    कभी उसने बनाना है नहीं अपना
    कभी होने नहीं देना पराया भी
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    भरता हूँ सिगरेट खाली जाम करता हूँ
    रातो दिन बस इक यही तो काम करता हूँ

    इक तरफ़ होती ख़ुशी है उसके जाने से
    इक तरफ़ जाने से मैं कोहराम करता हूँ

    दुश्मनों में आती है गिनती मेरी उसके
    पर मैं उसके दोस्तों का काम करता हूँ

    नाम पर उसके हो जाती जंग है मेरी
    उसको लगता है उसे बदनाम करता हूँ

    ग़ज़लें मेरी हैं किसी की यादें मेरे दोस्त
    ग़ैरों के दम पर मैं अपना नाम करता हूँ
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    अब अकेलेपन से अपने दोस्ती कर के
    कमरे में रहता हूँ तन्हा तीरगी कर के

    आँखों से आँसू निकल आए ये मुमकिन है
    पर हँसा सकते नहीं हो गुदगुदी कर के

    झूठ वाले वो तो बेहद बढ़ गए आगे
    फँस गया हूँ सच तेरी मैं पैरवी कर के

    यादों का उसकी ख़ज़ाना पास है मेरे
    छीन ले कोई मेरे आगे छुरी कर के

    हाईवे पर बैठ कर ये सोचता हूँ मैं
    दर्द कम हो जाएगा क्या ख़ुदकुशी कर के

    मश्वरा उसको जिसे सुनता नहीं कोई
    गुफ़्तुगू दीवार से देखे कभी कर के
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    बहुत लगता बुरा है क़हक़हा मुझको
    न जाने हो गया है दोस्त क्या मुझको

    उसे कहना कि उसके बाद जाने के
    सिवा उसके नहीं कुछ भी दिखा मुझको

    मैं तो हर मसअला उसका समझता हूँ
    समझता है मगर वो मसअला मुझको

    निकलते हैं तेरे ही फूल यादों के
    रखे है इक शजर यूँ भी हरा मुझको

    समुंदर पार करना है जुदाई का
    मेरी ही ले न डूबे ये अना मुझको
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    नाम तेरा गुन-गुनाता जा रहा हूँ
    तीरगी को मैं मिटाता जा रहा हूँ

    लुत्फ़ आता है उदासी में मुझे अब
    हर ख़ुशी में ग़म मिलाता जा रहा हूँ

    छोड़ने आया नहीं है कोइ मुझको
    हाथ मैं किसको हिलाता जा रहा हूँ

    बज रहे हैं रात के दो मैं मुसलसल
    गीत नुसरत के बजाता जा रहा हूँ
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    अगर तुझपे हमारा दिल नहीं आता
    हमारी ज़िन्दगी में थ्रिल नहीं आता

    मुझे तो जान देनी पड़ रही है अब
    सुना था आशिक़ी का बिल नहीं आता

    कि इक अफ़वाह सुन ख़ुश हो गए बच्चे
    कि पेपर इश्क़ का मुश्क़िल नहीं आता

    कहीं हम डूब जाते उस समंदर में
    भला होता कभी साहिल नहीं आता

    बटन तू खोलती थी शर्ट के तिल तिल
    तुझे ये याद भी तिल तिल नहीं आता
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    आपकी कोई निशानी भी नहीं है
    कम हमारी ज़िंदगानी भी नहीं है

    कोई समझे काश दरिया की उदासी
    शांत रहता है रवानी भी नहीं है

    आग बढ़ती जा रही है दिल मकाँ में
    देखना है बस बुझानी भी नहीं है

    बात मैंने माननी दिल की नहीं है
    अब मुझे अपनी चलानी भी नहीं है
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    "याद आती है"
    जब अब्र की काली घटा छाती है
    मुझे तेरी याद आती है

    जब फोन में मिस कॉल आती है
    मुझे तेरी याद आती है

    जब गांव में तेरे शहर की बस आती है
    मुझे तेरी याद आती है

    जब उदासी की वजह माँ पूछने लग जाती है
    मुझे तेरी याद आती है

    जब सरकार मेनिफेस्टो दिखाती है
    मुझे तेरी याद आती है

    जब रामायण में सीता राम से अलग हो जाती है
    मुझे तेरी याद आती है
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