
आप की कोई निशानी भी नहीं है
कम हमारी ज़िंदगानी भी नहीं है
कोई समझे काश दरिया की उदासी
शांत रहता है रवानी भी नहीं है
आग बढ़ती जा रही है दिल मकाँ में
देखना है बस बुझानी भी नहीं है
बात मैं ने माननी दिल की नहीं है
अब मुझे अपनी चलानी भी नहीं है
— AKASH
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