तुम्हारे ग़म कभी ओझल न होंगे
हमेशा हम मगर बेकल न होंगे
ख़ुदा तुम को कहेगा फिर भला कौन
ज़माने में अगर पागल न होंगे
लगी है ऐसी इक आँखों में तस्वीर
कलर जिस के कभी भी डल न होंगे
हँसी पे तो यक़ीं कर सकते हैं हम
मगर आँसू रिलायेबल न होंगे
— AKASH
हमेशा हम मगर बेकल न होंगे
ख़ुदा तुम को कहेगा फिर भला कौन
ज़माने में अगर पागल न होंगे
लगी है ऐसी इक आँखों में तस्वीर
कलर जिस के कभी भी डल न होंगे
हँसी पे तो यक़ीं कर सकते हैं हम
मगर आँसू रिलायेबल न होंगे
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