Zehra Nigaah

Zehra Nigaah

@zehra-nigaah

Zehra Nigaah shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zehra Nigaah's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तुम से हासिल हुआ इक गहरे समुंदर का सुकूत और हर मौज से लड़ना भी तुम्हीं से सीखा — Zehra Nigaah
कहाँ के इश्क़-ओ-मोहब्बत किधर के हिज्र-ओ- विसाल अभी तो लोग तरसते हैं ज़िन्दगी के लिए — Zehra Nigaah
हर फ़िक्र की अपनी मंज़िल थी हर सोच का अपना रस्ता था — Zehra Nigaah
अब भी कुछ लोग सुनाते हैं सुनाए हुए शे'र बातें अब भी तिरी ज़ेहनों में बसी लगती हैं — Zehra Nigaah
छोटी सी बात पे ख़ुश होना मुझे आता था पर बड़ी बात पे चुप रहना तुम्हीं से सीखा — Zehra Nigaah
ख़ताएँ दोनों की यकसाँ थी पर त'अज्जुब है किसी को दाद मिली और किसी को रुसवाई — Zehra Nigaah
नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए — Zehra Nigaah
एक के घर की ख़िदमत की और एक के दिल से मोहब्बत की दोनों फ़र्ज़ निभा कर उस ने सारी उम्र इबादत की — Zehra Nigaah
अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है कोई आ जाए तो वक़्त गुज़र जाता है — Zehra Nigaah
इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं — Zehra Nigaah

Ghazal

Nazm

"सुना है" सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है सुना है शे'र का जब पेट भर जाए तो वो हमला नहीं करता दरख़्तों की घनी छाँव में जा कर लेट जाता है हवा के तेज़ झोंके जब दरख़्तों को हिलाते हैं तो मैना अपने बच्चे छोड़ कर कव्वे के अंडों को परों से थाम लेती है सुना है घोंसले से कोई बच्चा गिर पड़े तो सारा जंगल जाग जाता है सुना है जब किसी नद्दी के पानी में बए के घोंसले का गंदुमी रंग लरज़ता है तो नद्दी की रुपहली मछलियाँ उस को पड़ोसन मान लेती हैं कभी तूफ़ान आ जाए, कोई पुल टूट जाए तो किसी लकड़ी के तख़्ते पर गिलहरी, साँप, बकरी और चीता साथ होते हैं सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है ख़ुदावंदा! जलील ओ मो'तबर! दाना ओ बीना! मुंसिफ़ ओ अकबर! मेरे इस शहर में अब जंगलों ही का कोई क़ानून नाफ़िज़ कर! — Zehra Nigaah