नाम तेरा गुन-गुनाता जा रहा हूँ
तीरगी को मैं मिटाता जा रहा हूँ
लुत्फ़ आता है उदासी में मुझे अब
हर ख़ुशी में ग़म मिलाता जा रहा हूँ
छोड़ने आया नहीं है कोई मुझ को
हाथ मैं किस को हिलाता जा रहा हूँ
बज रहे हैं रात के दो मैं मुसलसल
गीत नुसरत के बजाता जा रहा हूँ
— AKASH















