बस निकलता ही नहीं है दम हमारा
तुम समझ सकते नहीं हो ग़म हमारा
हो गया है हक़ अब उस पर दूसरों का
मिट गया है यार अब परचम हमारा
अब सितारे पूछते हैं रोज़ मुझ से
कब करेगा चाँद ये चम चम हमारा
फोल्डर इक याद का अब है मिटाना
हैंग करता है बहुत सिस्टम हमारा
— AKASH















