AKASH
AKASH
Ghazal

बस निकलता ही नहीं है दम हमारा

तुम समझ सकते नहीं हो ग़म हमारा

हो गया है हक़ अब उस पर दूसरों का
मिट गया है यार अब परचम हमारा

अब सितारे पूछते हैं रोज़ मुझ से
कब करेगा चाँद ये चम चम हमारा

फोल्डर इक याद का अब है मिटाना
हैंग करता है बहुत सिस्टम हमारा

— AKASH

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