AKASH
AKASH
Ghazal

वही आँखें वही ग़ुस्सा मेरे दोस्त

अभी भी कुछ नहीं बदला मेरे दोस्त

मेरे सीने तलक आती थी खिंच के
थी छोटी सी मेरी दुनिया मेरे दोस्त

नहीं चलती मेरी दिल पर यहाँ पर
तुम्हारा चलता है सिक्का मेरे दोस्त

मेरी इन शहरों से बनती नहीं है
हैं पर्वत दरिया हैं सहरा मेरे दोस्त

अलग रक्खा है सब यारों से तुझ को
हो जैसे ताश में इक्का मेरे दोस्त

— AKASH

More by AKASH

Other ghazal from the same pen

See all from AKASH →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling