वही आँखें वही ग़ुस्सा मेरे दोस्त
अभी भी कुछ नहीं बदला मेरे दोस्त
मेरे सीने तलक आती थी खिंच के
थी छोटी सी मेरी दुनिया मेरे दोस्त
नहीं चलती मेरी दिल पर यहाँ पर
तुम्हारा चलता है सिक्का मेरे दोस्त
मेरी इन शहरों से बनती नहीं है
हैं पर्वत दरिया हैं सहरा मेरे दोस्त
अलग रक्खा है सब यारों से तुझ को
हो जैसे ताश में इक्का मेरे दोस्त
— AKASH















