AKASH
AKASH
Ghazal

मुहब्बत का नया इक सीन करते हैं

कहाँ हम ज़ीस्त अब ग़मगीन करते हैं

तेरे बे-रंग मौसम याद आते हैं
मुझे किस होंठ जब रंगीन करते हैं

हमारे दोस्तों की ख़ासियत है ये
हमारी वो बहुत तौहीन करते हैं

मुझे वो देख कर के थे कभी कहते
मेरे दिल में सदा शाहीन करते हैं

लगे आसान राहें हर मुसाफ़िर को
यही हम सोच रस्ते क्लीन करते हैं

— AKASH

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