Sanskar Shrivastav

Sanskar Shrivastav

@sanskar

Sanam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sanam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

थोड़ी कोशिश तुम भी करना मैं कहता हूँ निभ जाएगा — Sanskar Shrivastav
मुझे मालूम है मैं प्यार में नाकाम हूँ लेकिन मुझे मिल कर सभी बच्चे हमेशा मुस्कुराते हैं — Sanskar Shrivastav
उतर आता है आँखों में कभी भी हमारा ख़ून आँसू बन गया है — Sanskar Shrivastav
भले ही देर हो जाए मगर तुम लौट कर आना मुझे पूरा भरोसा है कि हम सब ठीक कर लेंगे — Sanskar Shrivastav
उसे भुला कर नहीं पता कुछ हुआ तुझे या नहीं हुआ पर तुझे भुला कर बिखर गया है कहीं किसी का जहान सारा — Sanskar Shrivastav
कभी उल्टा कभी सीधा बनेगा बनाओगे तभी चेहरा बनेगा — Sanskar Shrivastav
चाँद अकेला पड़ जाएगा इतनी जल्दी मत सोया कर — Sanskar Shrivastav
पैर तुम्हारे महावर वाले छू कर के मेरा सूना आँगन घर हो जाएगा — Sanskar Shrivastav
कुछ पल और धड़कता रह दिल वो आ जाए फिर थम जाना — Sanskar Shrivastav
उसको क्या मतलब होगा तेरे दिल से तेरा आशिक़ तेरा सीना माँगेगा — Sanskar Shrivastav
तुम ने जाने का सोचा है जो भी हो अच्छा सोचा है — Sanskar Shrivastav
नसीहत आप को देते रहेंगे किया है प्यार हम ने भी किसी से — Sanskar Shrivastav
तुम हमेशा बात करती थीं बड़े ही प्यार से फिर भला क्या हो गया क्यूँ इस तरह चुप हो गईं — Sanskar Shrivastav
लखन उर्मिला की कहानी यही है किया त्याग ऐसा कि दुनिया ऋणी है — Sanskar Shrivastav
हमारी आँख सहरा हो गई है हमें अब सब्र करना आ गया है — Sanskar Shrivastav
हमें इल्ज़ाम देते हो हमारी सोच छोटी है ज़रा हम को बता दो यार तुम ने क्या उखाड़ा है — Sanskar Shrivastav
रण हो या शतरंज की कोई बाज़ी हो आस सभी को अर्जुन से ही होती है — Sanskar Shrivastav
सोच रहा हूँ तन्हाई से बात करूँ मैं ख़ुद की ही परछाई से बात करूँ — Sanskar Shrivastav
तुम पर जँचता है भोलापन माथे पर बिंदी के जैसे — Sanskar Shrivastav

Ghazal

Nazm

"सनम" हाथ में हाथ तेरा मैं ले के सनम ले चलूँ तुझ को ऐसे सफ़र में सनम तेरी आँखों का काजल मैं बनके सदा रहना चाहूँ मैं तेरी नज़र में सनम तेरे संग मैं हमेशा रहूँगा मगर मेरे संग तू रहेगी ये वा'दा तो कर तेरी ख़्वाहिश को पूरा करूँँगा सदा तेरी आँखें कभी नम न होंगी सनम चाँद तारों का वा'दा नहीं है मेरा तेरे सपनों को पूरा करूँँगा मगर रात को जुगनुओं की तरह संग तेरे रहूँगा उजाला मैं बनके सनम चोट जब भी लगेगी तुझे तब तेरे घाव पे बनके मरहम रहूँगा सदा मैं ने सोचा है क्या कुछ नहीं संग तेरे साथ रहना तू हर इक डगर पे सनम तुझ में जादूगरी कुछ है ऐसी सनम हो गया हूँ मैं तेरा दीवाना सनम लोग कहते हैं आँखों को मयखाना पर मैं कहूँ तेरी आँखों को मंदिर सनम बात दिल की जो आई लबों पे मेरे बात दिल की तुझे मैं कहूँगा सनम पत्थरों से बना जो मकाँ है मेरा आके इस को बना देना घर तू सनम — Sanskar Shrivastav
"गाँव का जीवन" गाँव का जीवन शहरों से कम नहीं वो मिट्टी का घर महलों से कम नहीं रोटी पर घी नमक लगाकर खाते हैं शहर के चीज़ वाले पिज़्ज़ा नहीं भाते हैं यहाँ पीते हैं कुएं का ऐसा पानी हम शहर में जो पैसे देकर भी नहीं पी पाते हैं पेड़ों की ठंडी हवा ऐसी से कम नहीं नेट ना चलने का यहाँ कोई ग़म नहीं क्रिकेट यहाँ लकड़ी के डंडे से खेलते हैं बड़ों की डाँट भी यहाँ हंस कर झेलते हैं शहर में आम भी बाज़ार से लाते हैं शहर के बच्चे पेड़ पर कहाँ चढ़ पाते हैं कभी घर का मथा हुआ मक्खन खाया है जिस की बराबरी पैकेट का बटर कहाँ कर पाया है आज भी मेहमानों को बुला कर घर लाते हैं शहर में तो मेहमान आने से मुह बन जाते हैं नीचे बैठ कर यहाँ सब खाना खाते हैं रात को छत पर तारों के नीचे सो जाते हैं गाँव के कच्चे झूले पर जो एक बार झूल जाओगे सच कहता हूँ शहर का जीवन भूल जाओगे — Sanskar Shrivastav