aaiye to ik dafa is jhopdi men | आइए तो इक दफ़ा इस झोपड़ी में

  - Sanskar 'Sanam'

आइए तो इक दफ़ा इस झोपड़ी में
बैठिए ना चाँद की इस रौशनी में

वो नहीं करती है मुझ सेे बात अब
क्या मज़ा आता है उसको बे-दिली में

उनका मंज़िल तक भी जाना व्यर्थ है
भूल जाते हैं जो रस्ता वापसी में

हैं वो मारे वक़्त के अब देख लो
सारे माहिर इक समय थे जंतरी में

एक लड़का शायरी करता था जो
पिस रहा है अब वो देखो नौकरी में

होश न रहता है सुनकर क्या करें
कृष्ण है जादू तुम्हारी बाँसुरी में

  - Sanskar 'Sanam'

Bekhabri Shayari

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