जब भी कोई यार बनाने जाते हैं
जाने क्यूँ अक्सर ही धोका खाते हैं
इक लड़के की सारी ग़लती होती है
फिर सब लड़के वैसे ही कहलाते हैं
जिन फूलों से माली नफ़रत करता है
फूल वही अक्सर जल्दी मुरझाते हैं
जिनको मेरा होना अच्छा लगता था
वो सारे भी मुझ सेे अब उकताते हैं
केसरिया के दौर में भी उसके ख़ातिर
हम तो बस इक प्यार का नग़मा गाते हैं
बात अगर घर की आए तो हम लड़के
अक़्सर अपनी ख़ुशियों को ठुकराते हैं
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