माना थोड़ा मुश्किल था मैं
लेकिन तेरे क़ाबिल था मैं
तू ने मुझ को दरिया समझा
लेकिन पूरा साहिल था मैं
तेरे इस जीवन की सारी
अच्छाई का हासिल था मैं
तू इस रिश्ते में आधी थी
इस रिश्ते में कामिल था मैं
तू थी तो रौनक़ थी मुझ में
ख़ुद में सारी महफ़िल था मैं
मुझ से ही तो जीता था ये
अपने रिश्ते का दिल था मैं
— Sanskar Shrivastav















