कभी उल्टा कभी सीधा बनेगा
बनाओगे तभी चेहरा बनेगा
अभी तो खेलने दें मन लगा कर
नहीं सोचें कि बच्चा क्या बनेगा
कमी मेरी बताते फिर रहे हैं
भला क्या आप से रिश्ता बनेगा
कभी तो ख़त्म होंगी दूरियाँ ये
कभी तो प्यार दो-तरफ़ा बनेगा
कहाँ पर ख़त्म होते हैं किनारे
बता मुझ को कहाँ दरिया बनेगा
तुझे देखा किया है जिस तरह से
हमारी आँख का चश्मा बनेगा
— Sanskar Shrivastav















