वनवासी इक राजा वो निष्काम हुए
बात पिता की रख ली तो ही राम हुए
कितने दिन से चैन नहीं आया मुझ को
बरसों बीत गए हैं अब तो शाम हुए
जब मैं ने माँ को हँसते देखा था तब
घर बैठे ही मेरे चारों धाम हुए
हर लड़की राधा के जैसी लगती है
प्यार में देखो लड़के सारे श्याम हुए
मेरे दिल की सारी ग़ज़लें तेरी हैं
मेरे सारे शे'र भी तेरे नाम हुए
बिल्ली ने रस्ता काटा है पर फिर भी
मेहनत कर के पूरे मेरे काम हुए
— Sanskar Shrivastav















