एक दिन ऐसा वीरान बन जाऊँगा
जैसे मानो कि शमशान बन जाऊँगा
कृष्ण सुन लेंगे मेरी दु'आ एक दिन
एक दिन मैं तेरी जान बन जाऊँगा
तेरे सर की क़सम मैं ने सोचा न था
तेरे जीवन में अंजान बन जाऊँगा
मैं तुझे यूँ लिखूँगा मेरे शे'र में
एक दिन तेरी पहचान बन जाऊँगा
लोग मुझ को भी जानेंगे उस नाम से
मेरे पापा का सम्मान बन जाऊँगा
राम मुझ को भी छू जाएँगे एक दिन
एक दिन मैं भी इंसान बन जाऊँगा
— Sanskar Shrivastav















