मैं ने अब तक जो जो औरत देखी है

मैं ने सब के अंदर हिम्मत देखी है

उस के बा'द नहीं देखा जाता है कुछ
जबसे मैं ने उस की सूरत देखी है

अपने मतलब की ख़ातिर गिर जाते हैं
नेताओं में इतनी नफ़रत देखी है

प्यार करूँगा मैं उस को मरते दम तक
मैं ने मीरा जी की चाहत देखी है

मात पिता को बोझ समझते बच्चों में
मैं ने चलती फिरती लानत देखी है

माँ को देखा तो मैं ये कह सकता हूँ
मैं ने सब से महँगी दौलत देखी है

— Sanskar Shrivastav

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Hausla Shayari

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