rishton ko har baar sambhaale rakkha hai | रिश्तों को हर बार सँभाले रक्खा है

  - Sanskar 'Sanam'

रिश्तों को हर बार सँभाले रक्खा है
जैसे भी हो यार सँभाले रक्खा है

तेरी यादें जिसके अंदर क़ैद करी
वो ही दिल बेज़ार सँभाले रक्खा है

इक बेटे ने भेजा था सरहद से जो
माँ ने वो इक तार सँभाले रक्खा है

बचपन के वो खेल खिलौने गुल्लक संग
बचपन का इतवार सँभाले रक्खा है

छोटा था तो समझ नहीं पाया कितना
बाबूजी ने भार सँभाले रक्खा है

मैं तेरा वो ही आशिक़ हूँ जान-ए-जाँ
जिसने तेरा प्यार सँभाले रक्खा है

  - Sanskar 'Sanam'

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