एक अकेला दिल पत्थर हो जाता है
देखा जाए तो अक़्सर हो जाता है
बंदिश कैसे आ सकती है बहरों से
शे'र इसी से ही बेहतर हो जाता है
जब भी तेरी यादों में बहता है ये
मेरा हर आँसू सागर हो जाता है
इस गाँव में जब भी बारिश होती है
बेबस हर घर का छप्पर हो जाता है
छीना जाता है उन सेे जब फूलों को
बाग़ भी तब थोड़ा बंजर हो जाता है
देव हुए अमृत पीकर, विष पीकर के
महादेव वो शिव शंकर हो जाता है
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