sacchaai ka saath nibhaana mushkil hai | सच्चाई का साथ निभाना मुश्किल है

  - Sanskar 'Sanam'

सच्चाई का साथ निभाना मुश्किल है
झूठे को झूठा बतलाना मुश्किल है

जिस महफ़िल में सब ही बहरे बैठे हों
उस महफ़िल में गीत सुनाना मुश्किल है

वो जिनकी छाया में ही बैठे हैं सब
उन पेड़ों को छाँव दिलाना मुश्किल है

जिन नदियों के तट ही मिलने वाले हों
उन नदियों से प्यास बुझाना मुश्किल है

वो जिनके धागे ही बिल्कुल कच्चे हों
तूफ़ां में वो पतंग उड़ाना मुश्किल है

ख़ुद से लिखना शुरू किया तो जाना ये
यार सही ग़ज़लें लिख पाना मुश्किल है

  - Sanskar 'Sanam'

Patang Shayari

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