hai kisi zaalim urdu ki ghaat darwaaze mein hai | है किसी जालिम उदू की घात दरवाज़े में है

  - Farhat Abbas Shah

है किसी जालिम उदू की घात दरवाज़े में है
या मसाफ़त है नई या रात दरवाज़े में है

जिस तरहा उठती है नजरें बे-इरादा बार-बार
साफ़ लगता है के कोई बात दरवाजे में

  - Farhat Abbas Shah

Urdu Shayari

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