यहाँ पर चलता है जलवा हमारा
तू कुछ भी कर नहीं सकता हमारा
बहुत अच्छा हमारा दिल है लेकिन
बहुत बेकार है लहजा हमारा
जो आए काटने थे माँझा यारों
कटा उन से नहीं धागा हमारा
दबा कर उँगलियाँ दाँतों में बोली
कभी तू फोन काटेगा हमारा
वो आके अपना रख देती है बस्ता
जहाँ पर होता है बस्ता हमारा
— AKASH















