भरता हूँ सिगरेट ख़ाली जाम करता हूँ
रातो दिन बस इक यही तो काम करता हूँ
इक तरफ़ होती ख़ुशी है उस के जाने से
इक तरफ़ जाने से मैं कोहराम करता हूँ
दुश्मनों में आती है गिनती मेरी उस के
पर मैं उस के दोस्तों का काम करता हूँ
नाम पर उस के हो जाती जंग है मेरी
उस को लगता है उसे बदनाम करता हूँ
ग़ज़लें मेरी हैं किसी की यादें मेरे दोस्त
ग़ैरों के दम पर मैं अपना नाम करता हूँ
— AKASH















