हँसाया भी कभी मुझ को रुलाया भीये थोड़ा थोड़ा मुझ को हिज्र भाया भीतेरे जाने का जाएगा नहीं ये ग़मअगर तू पास मेरे लौट आया भीवो आलम देखा है तन्हाई का मैं नेनहीं मुझ से था करता बातें साया भीकभी उस ने बनाना है नहीं अपनाकभी होने नहीं देना पराया भी— AKASH