वोट दे आते हो तुम सब जात, फ़िरक़ा देख कर
ऐ वतन के वासियों इस
ऐ वतन के वासियों इस
में है ख़तरा, देख कर
फिर नहीं तुम बा'द में सब चीखते रह जाओगे
इस सियासी दौड़ में शामिल है बहरा, देख कर
Read Fullफिर नहीं तुम बा'द में सब चीखते रह जाओगे
इस सियासी दौड़ में शामिल है बहरा, देख कर
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है अज़ीज़ ये मुझ को आँख में जो पानी है
ये मेरे मोहब्बत की आख़िरी निशानी है
ये मेरे मोहब्बत की आख़िरी निशानी है
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ख़ुद की अनल से है चमकना जानते
हम डूबते तारे हुए तो क्या हुआ
हम डूबते तारे हुए तो क्या हुआ
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बह रही है फिर वही पुरवा सुहानी रात में
चल पड़ी है स्वप्न की फिर राजधानी रात में
चल पड़ी है स्वप्न की फिर राजधानी रात में
लौट आया है मेरा बचपन दुबारा फिर वही
फिर सुनाएँगी मुझे दादी कहानी रात में
फिर लुटेगा दिल किसी का देखना आकाश में
बढ़ रही है चाँद की फिर नित जवानी रात में
फिर सितारों की कोई बारात निकलेगी यहाँ
फिर उतर आएँगी परियाँ आसमानी रात में
फिर चमकने लग गए जुगनू मेरे अतराफ़ में
फिर से मिलने आ गई पागल दिवानी रात में
फिर कमल खिलने लगे हैं गाँव के तालाब में
फिर महकने लग गई है रात रानी रात में
छोटी मोटी बात पर लड़ना झगड़ना रोज़ ही
दिन की सारी दुश्मनी फिर भूल जानी रात में
फिर शरारत बढ़ गई हैं सारे बच्चों की बहुत
फिर डराने आएगी भूतों की नानी रात में
जब पिशाचों का मिलन होता है काली रात में
तब लहू बन जाता है दरिया का पानी रात में
और सुनना है अगर 'उपदेश' आना गाँव में
फिर सुनाएँगे कभी बाक़ी कहानी रात में
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करने वाले कितनी बार नहीं करते
दोस्त कभी हम दो का चार नहीं करते
दोस्त कभी हम दो का चार नहीं करते
करने वाले राज दिलों पर करते हैं
मज़लूमों पर अत्याचार नहीं करते
एक अरसे से यार ख़फ़ा हो ऐसे तुम
काश कि हम तुम से तकरार नहीं करते
कौन ख़फ़ा होता है ऐसी बातों पर
चाहत में सब क्या क्या यार नहीं करते
दौलत देख के आने वाले तू भी जा
हम भी तुम से सच्चा प्यार नहीं करते
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तमाम आँसू अगर शब्दों में ढल जाते तो अच्छा था
तेरी यादों से हम बाहर निकल जाते तो अच्छा था
तेरी यादों से हम बाहर निकल जाते तो अच्छा था
इसी इक आस में हम ने कई नदियाँ बहा डालीं
ए पत्थर दिल कहीं तुम भी पिघल जाते तो अच्छा था
अदावत के कई शो'ले भड़कते थे मगर दिल फिर
यही कहता किसी के तुम महल जाते तो अच्छा था
खिलौना तो नहीं है वो जो उस को फिर से ला दूँगा
ए मेरे दिल कहीं तुम भी बहल जाते तो अच्छा था
सर-ए-महफ़िल बता कर यूँॅूँ हुए रुस्वा हमीं तो हैं
कि सारे राज़ दिल के हम निगल जाते तो अच्छा था
पुरानी बात को ले कर, जो पछताओ! तो क्या हासिल
अगर तुम वक़्त रहते ही सँभल जाते तो अच्छा था
ज़माने और थे उन के मोहब्बत और थी उन की
जो मेहमानों से कहते थे कि कल जाते तो अच्छा था
ज़माने को बदलने की हर इक नाकाम कोशिश से
कहीं बेहतर था हम ख़ुद ही बदल जाते तो अच्छा था
सजी है बज़्म उल्फ़त की अगर 'उपदेश' ऐसे में
सभी बे-मौसमी बादल भी टल जाते तो अच्छा था
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