सुनो न जान मेरी आज शाम तुम ठहर जाओ
शराब की मिरी ये तिश्नगी बुझा के घर जाओ
शराब की मिरी ये तिश्नगी बुझा के घर जाओ
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सरसरी सी ये बात जा-गुज़ीं है
के हया उन में थोड़ी भी नहीं है
के हया उन में थोड़ी भी नहीं है
लोग वो ख़ाक होंगे ग़ैरतमंद
जो वफ़ादार इक ज़रा नहीं है
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इक ख़ता पर मिरी ख़फ़ा हो गए
दिखा कर ख़्वाब वो जुदा हो गए
दिखा कर ख़्वाब वो जुदा हो गए
रूठ कर बिछड़े इस तरह से वो
इश्क़ में यार भी ख़ुदा हो गए
बे-वफ़ा लड़की की मोहब्बत में
देख लो हम भी क्या से क्या हो गए
लोग क्या अपने भी मुसीबत में
वक़्त के रहते गुम-शुदा हो गए
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हम काट लेंगे हिज्र की ये रातें भी
पहले मोहब्बत भी ज़रा हो तो सही
Read Fullपहले मोहब्बत भी ज़रा हो तो सही
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मोहब्बत जो समझते हैं
वहीं हम को समझते हैं
वहीं हम को समझते हैं
फ़क़त अब हम हक़ीकत भी
यूँ ख़्वाबों को समझते हैं
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हाँ ये लहजा तिरा बता रहा हैं
पहले सी बात अब नहीं तुझ में
पहले सी बात अब नहीं तुझ में
ख़ुद को तुम क्यूँ बदलती जा रही हो
ऐसा भी क्या ही मिल गया है तुम्हें
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अहद-ए-वफ़ा और झूट मैं सब सीख लूँ
रस्म-ए-मोहब्बत तुम सिखाओ तो सही
रस्म-ए-मोहब्बत तुम सिखाओ तो सही
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