क्यूँ वो ग़म याद दिलाता है मुझे
क्यूँ तू वो बातें सुनाता है मुझे
क्यूँ तू वो बातें सुनाता है मुझे
दिख न पाएँ मुझे वो ग़म उस के
इतना वो हँस के दिखाता है मुझे
दिन की तो बात नहीं कोई मगर
दिल ये रातों में जगाता है मुझे
बे-वफ़ाई तो बहुत दूर है अब
अब तो वो दिल में बसाता है मुझे
प्यार तो करता है पर मुझ से नहीं
ये ख़याल अब तो रुलाता है मुझे
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तेरी बिखरी हुई यादों से अब मैं
नई ग़ज़लें बनाना चाहता हूँ
नई ग़ज़लें बनाना चाहता हूँ
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मेरी इक ही तमन्ना है कि मैं अब
तेरे ख़्वाबों में आना चाहता हूँ
तेरे ख़्वाबों में आना चाहता हूँ
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