चाँद सूरज की चमक और सितारा देखो
बाम से उतरो उतरते ही दुबारा देखो
बाम से उतरो उतरते ही दुबारा देखो
पहले देखो मिरी आँखों में मुहब्बत अपनी
कुछ न दिख पाए तो दरिया का किनारा देखो
जो तरफ़दार थे अख़लाक़ के उन सबके सिवा
कैसे कैसों को दिया उस ने सहारा देखो
माँगता कौन बग़ावत की पज़ीराई पर
कैसे करते हैं यहाँ लोग गुज़ारा देखो
हो ख़सारा तो बताते हैं मुनाफ़ा ये लोग
और मुनाफ़े से ये कहते हैं ख़सारा देखो
10
2 Likes
ज़ीस्त की अस्ल हक़ीक़त से डरा करते हैं
अब तो रहगीर भी हिजरत से डरा करते हैं
दिल-लगी ने नहीं आदत ने डराया हम को
लोग सिगरेट से नहीं लत से डरा करते हैं
आप इज़हार ए मुहब्बत से डरा करते थे
माज़रत हम तो मुहब्बत से डरा करते हैं
उन को बचपन में कभी माँ ने डराया होगा
वो सभी मर्द जो औरत से डरा करते हैं
जिस्म को बाप की दस्तार समझने वाले
पास आ कर भी शरारत से डरा करते हैं
9
2 Likes
8
0 Likes
इक बार उस ने आँख दिखाई थी मुझ को दोस्त
नीचे है उस की आज तलक आस्तीन देख
वो दोस्ती निभाएगा इस दुश्मनी के बा'द
अपने रक़ीब पर कभी कर के यक़ीन देख
मासूमियत भी मिट गईं नादानियाँ भी ख़त्म
इक हादसे ने कर दिया कितना ज़हीन देख
चालाकियाँ ये ख़्वाहिशें आदम से कहती हैं
बेहतर को पा लिया है तो अब बेहतरीन देख
फूलों का गोश्त नोच के काँटों को चुन लिया
ये तितलियाँ भी ख़ून की हैं शाइक़ीन देख
स्कूल के दिनों में जिन्हें देखते न थे
वो लड़कियाँ भी हो गईं कितनी हसीन देख
7
2 Likes
इश्क़ में हो के जो बदनाम नहीं आते हैं
उन के प्यालों में कभी ज़ाम नहीं आते हैं
उन के प्यालों में कभी ज़ाम नहीं आते हैं
लोग जो दौड़ यहाँ दौड़ रहे हैं हर पल
मुझ को ये सब रविश-ए-आम नहीं आते हैं
गाँव छोड़ा तो कटी रात ज़मीं पे मेरी
इस बड़े शहर में ख़य्याम नहीं आते हैं
रूह को लोग बनाने में लगे हैं पत्थर
अब अहिल्या के लिए राम नहीं आते हैं
शादी से पहले सभी लोग यही कहते हैं
मुझ को कोई भी बुरे काम नहीं आते हैं
6
2 Likes
सबका यक़ीन बढ़ने लगा ख़ाकसार पर
या'नी कि चोट पड़ने लगी है दरार पर
या'नी कि चोट पड़ने लगी है दरार पर
जिस की रखी हो नींव यहाँ पासवर्ड से
कैसे मैं ऐतिबार करूँ ऐसे प्यार पर
वो शख़्स जिस ने रोज़ मुझे अनसुना किया
वो शख़्स कैसे लौट गया इक पुकार पर
चर्चे हमारी हार के होने लगे थे सो
सबने हमारा नाम लिखा इश्तिहार पर
इक लड़की की पसंद से शादी हुई है आज
या'नी कि दीप जलने लगे घर के द्वार पर
मैं ने ज़बान सौंप दी है उस के हाथ में
वो भी क़रार करने लगी है क़रार पर
वो मेरे साथ उतना ठहरती है जितना देर
इक बूँद ठहरी रहती है बिजली के तार पर
कुछ इस तरह वो होंठ पे रख कर गया है होंठ
रक्खे हों जैसे हाथ किसी ने गिटार पर
फिर से जवाब आने लगे हैं सवाल के
फिर से शराब चढ़ने लगी है ख़ुमार पर
5
1 Like
निकलकर क़ैद से बाहर नहीं आता
मेरे दर पर मेरा परवर नहीं आता
मेरे दर पर मेरा परवर नहीं आता
खिलौने ख़ुद बना कर खेलता था मैं
सभी के गाँव जादूगर नहीं आता
इशारों पर किसी के नाचता है वो
मेरे पत्तों में जो नंबर नहीं आता
तुम्हें इस ज़िंदगी का ग़म नहीं या'नी
तुम्हारी दाल में पत्थर नहीं आता
हमारे हिस्से में आवारगी आई
हमारे हिस्से कोई घर नहीं आता
4
1 Like
वो अपने घर की बड़ी बेटी थी सो मैं ने भी
बिछड़ते वक़्त उसे बे-वफ़ा नहीं बोला
बिछड़ते वक़्त उसे बे-वफ़ा नहीं बोला
3
3 Likes
वो दोस्ती निभाएगा इस दुश्मनी के बा'द
अपने रक़ीब पर कभी कर के यक़ीन देख
अपने रक़ीब पर कभी कर के यक़ीन देख
1
2 Likes










