हुस्न और इश्क़ की ग़फ़लत से डरा करते हैं
मेरे ग़म-ख़्वार अक़ीदत से डरा करते हैं
ज़ीस्त की अस्ल हक़ीक़त से डरा करते हैं
अब तो रहगीर भी हिजरत से डरा करते हैं
दिल्लगी ने नहीं आदत ने डराया हमको
लोग सिगरेट से नहीं लत से डरा करते हैं
आप इज़हार ए मुहब्बत से डरा करते थे
माज़रत हम तो मुहब्बत से डरा करते हैं
उन को बचपन में कभी माँ ने डराया होगा
वो सभी मर्द जो औरत से डरा करते हैं
जिस्म को बाप की दस्तार समझने वाले
पास आकर भी शरारत से डरा करते हैं
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