इश्क़ में हो के जो बदनाम नहीं आते हैं

उन के प्यालों में कभी ज़ाम नहीं आते हैं

लोग जो दौड़ यहाँ दौड़ रहे हैं हर पल
मुझ को ये सब रविश-ए-आम नहीं आते हैं

गाँव छोड़ा तो कटी रात ज़मीं पे मेरी
इस बड़े शहर में ख़य्याम नहीं आते हैं

रूह को लोग बनाने में लगे हैं पत्थर
अब अहिल्या के लिए राम नहीं आते हैं

शादी से पहले सभी लोग यही कहते हैं
मुझ को कोई भी बुरे काम नहीं आते हैं

— Lalit Pandey

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