वो कह रहा है बात असरदार भी रहे

पर चाहता है बीच में दीवार भी रहे

हम को क़रार-गाह मिली है तो क्या हुआ
हम मुद्दतों तलक तो तलबगार भी रहे

जिन को नहीं मिले हैं मुहब्बत में दुख कभी
वो लोग इश्क़ कर गए पुरकार भी रहे

इक पल भी मेरे साथ में वो रह नहीं सका
फूलों के साथ साथ मगर ख़ार भी रहे

मेरा रक़ीब मुझ को कहा करता है 'ललित'
है दुश्मनी तो हाथ में तलवार भी रहे

— Lalit Pandey

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