यारों को हमकलाम का मतलब नहीं पता
मुझ को भी इन्तेक़ाम का मतलब नहीं पता
राजा को है तलाश बड़े ख़ानदान की
शहज़ादी को ग़ुलाम का मतलब नहीं पता
मुझ को कभी तो ख़्वाब का रौशन चराग़ दे
मुझ को अभी भी शाम का मतलब नहीं पता
इक मैं जो उस की आँखों को कहता रहा शराब
इक तुम कि जिस को जाम का मतलब नहीं पता
होंगे जो कामयाब तो जोड़ेंगे वो भी हाथ
जिन को दुआ सलाम का मतलब नहीं पता
या'नी सभी को लड़ना है मज़हब के नाम पर
या'नी किसी को राम का मतलब नहीं पता
उस को तो सिर्फ़ शा'इरी से रब्त है ललित
उस को तुम्हारे काम का मतलब नहीं पता
— Lalit Pandey















